हरियाणा के सिरसा जिले ने समावेशी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एक नया उदाहरण पेश किया है। अब जिले की वार्ड समिति बैठकों में ट्रांसजेंडर समुदाय को ‘विशेष आमंत्रित’ के रूप में शामिल किया जाएगा। यह निर्णय हरियाणा में अपनी तरह का पहला माना जा रहा है और इसे स्थानीय प्रशासन में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।
जिला नगर आयुक्त वीरेंद्र सहरावत ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वार्ड स्तर पर होने वाली बैठकों में समाज के हर वर्ग की आवाज पहुंचे और उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने बताया कि अब वार्ड क्षेत्रों में रहने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधियों को नियमित रूप से बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा, जिससे वे सीधे तौर पर अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन के सामने रख सकें।
इस फैसले का ट्रांसजेंडर समुदाय ने स्वागत किया है। समुदाय के सदस्यों ने इसे एक सकारात्मक और ऐतिहासिक कदम बताया है, जिससे उन्हें स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलेगा। उनका कहना है कि अब वे अपनी सामाजिक और बुनियादी समस्याओं को खुलकर रख सकेंगे और समाधान की दिशा में काम कर पाएंगे। कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि वे नशे जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ जागरूकता फैलाने में प्रशासन का सहयोग करेंगे और समाज सुधार में योगदान देंगे।
प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय का सशक्तिकरण होगा, बल्कि स्थानीय शासन और अधिक पारदर्शी, समावेशी और प्रभावी बनेगा। साथ ही, यह कदम अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा साबित हो सकता है, जिससे सामाजिक समानता और सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।









