रायबरेली से सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi को कथित दोहरी नागरिकता मामले में बड़ी राहत मिली है। Allahabad High Court की लखनऊ बेंच ने अपने ही पहले दिए गए एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि बिना संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिए और उसका पक्ष सुने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देना न्यायसंगत नहीं है।
न्यायालय ने ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को पहले अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करने का फैसला किया और मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल तय की है। इससे पहले अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच कराने का आदेश दिया था। यह याचिका भाजपा कार्यकर्ता Vignesh Shishir द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि 2003 से 2009 के बीच एक ब्रिटिश कंपनी के दस्तावेजों में राहुल गांधी को ‘ब्रिटिश नागरिक’ बताया गया था। साथ ही उन पर विदेशी नागरिकता से जुड़े तथ्यों को छिपाने का भी आरोप लगाया गया। भारतीय कानून के अनुसार, दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। Article 9 of Indian Constitution के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।









