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भारतीय सैन्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी,CDS पेश करेंगे थिएटर कमांड प्रस्ताव

भारतीय सशस्त्र बलों की कमान व्यवस्था में आजादी के बाद सबसे बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है। हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बने जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणी इस महीने के अंत तक ‘थिएटर कमांड’ का विस्तृत प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष पेश करेंगे। रक्षा मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को अंतिम स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।

यह प्रस्ताव पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान द्वारा तैयार किए गए अंतिम मसौदे पर आधारित है। थिएटर कमांड व्यवस्था का उद्देश्य सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त संचालन को एकीकृत करना है, ताकि युद्ध या आपात स्थिति में तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही कमांडर के नेतृत्व में समन्वित तरीके से अभियान चला सकें। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।

प्रस्ताव के अनुसार तीन प्रमुख थिएटर कमांड गठित किए जाएंगे। नॉर्दर्न थिएटर कमांड चीन सीमा, वेस्टर्न थिएटर कमांड पाकिस्तान सीमा और मैरीटाइम थिएटर कमांड हिंद महासागर तथा अंडमान-निकोबार क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके अलावा चार नए फोर-स्टार रैंक के पद सृजित करने की भी योजना है, जिनमें एक वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद शामिल होगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद तीनों सेनाओं के प्रमुखों की भूमिका मुख्य रूप से प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संसाधनों के प्रबंधन तक सीमित रहेगी, जबकि वास्तविक सैन्य अभियानों का नेतृत्व थिएटर कमांडर करेंगे। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर तीनों सेनाओं के बीच कुछ मतभेद भी हैं। सेना और नौसेना इस मॉडल के पक्ष में हैं, जबकि वायुसेना का मानना है कि सीमित हवाई संसाधनों के अलग-अलग थिएटरों में बंटने से उनकी प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को CCS की मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारत की सैन्य कमान व्यवस्था में आजादी के बाद का सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार साबित होगा और चीन तथा पाकिस्तान जैसी दोहरी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में देश की सामरिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।