केंद्र सरकार जल्द ही मनरेगा का नाम बदलकर एक नई रोजगार योजना लाने जा रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को खत्म कर इसके स्थान पर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G बिल, 2025 लागू किया जाएगा। इस योजना में किसानों और ग्रामीणों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। नई योजना में राज्यों की भूमिका बढ़ाई गई है। अब राज्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तय करने का अधिकार होगा कि ग्रामीण श्रम शक्ति का इस्तेमाल किन कामों में किया जाए। इसके साथ ही काम की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पीएम गति शक्ति से जुड़ाव रखा गया है।
वित्तीय जिम्मेदारी भी अब केंद्र और राज्यों में बांटी जाएगी। सामान्य राज्यों के लिए लागत का अनुपात 60:40 होगा, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 रहेगा। इससे फंड और काम दोनों की बेहतर निगरानी संभव होगी। कृषि क्षेत्र में भी नई योजना राहत देगी। अब मजदूरों को खेती और खेती से जुड़े काम करने की सुविधा मिलेगी। राज्य 60 दिनों तक सार्वजनिक कामों को बुवाई और कटाई के मौसम में स्थगित कर सकते हैं, जिससे किसान अपने खेतों में मजदूरों की कमी का सामना नहीं करेंगे।
नई योजना के तहत रोजगार के अवसर 25 फीसदी बढ़ाए जाएंगे। डिजिटल उपस्थिति, आधार आधारित सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान अनिवार्य होंगे। यदि काम समय पर नहीं दिया गया तो बेरोजगारी भत्ता देना राज्य के लिए अनिवार्य होगा। ग्राम पंचायतों के सुझाव के आधार पर विकास कार्य तय होंगे और पंचायतों को A, B और C श्रेणी में रखा जाएगा। चार प्राथमिक क्षेत्र—जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, मौसमीय आपदा से सुरक्षा और आजीविका—इस योजना के तहत शामिल होंगे।
विपक्ष ने महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने की आलोचना की है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने इसे अनुचित बताया और सरकार से इस कदम के पीछे उद्देश्य स्पष्ट करने की मांग की। नई योजना से ग्रामीण रोजगार और कृषि क्षेत्र दोनों में संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे किसानों और मजदूरों को स्थिर रोजगार और बेहतर अवसर मिल सकें।









