प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में अहम मुलाकात हुई। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पुतिन गुरुवार देर रात भारत पहुंचे थे। पालम एयरपोर्ट पर विदेश राज्यमंत्री के.वी. सिंह ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में रक्षा सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खास तौर पर रूस के Su-57 फाइटर जेट को लेकर बातचीत पर सबकी नजरें हैं। माना जा रहा है कि भारत और रूस Su-57 के संभावित उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने के समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। अगर यह समझौता होता है, तो भारत की रक्षा क्षमताओं और एयरोस्पेस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है और इस बैठक को उसी रिश्ते को नई दिशा देने वाली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल भाषा के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भी भेंट किया। यह सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण पहचान है। तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित ‘तिरुक्कुरल’ में कुल 1330 दोहे हैं। इनमें नैतिक जीवन, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों पर गहरी विचारधारा प्रस्तुत की गई है। यह तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में गिनी जाती है और दुनिया की कई भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है। 2026 में इसके रूसी अनुवाद का प्रकाशन भी हुआ। पुतिन को इसका रूसी संस्करण भेंट कर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और रूस के रिश्तों में संस्कृति और साझा ज्ञान की भूमिका को भी रेखांकित किया।


