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अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर बड़ा फैसला आज, छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार-एनएमसी का आश्वासन

दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए धमाके की जांच ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर-उन-नबी यहीं कार्यरत था, जबकि कई अन्य डॉक्टरों के नाम भी जांच में सामने आए हैं। बैंक खातों में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद अब इस यूनिवर्सिटी के भविष्य पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। हरियाणा सरकार आज संस्थान के संचालन को लेकर बड़ा निर्णय ले सकती है।

हालांकि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने स्पष्ट किया है कि निर्दोष छात्रों की पढ़ाई और करियर प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। छात्रों की इंटर्नशिप, रजिस्ट्रेशन और प्रशिक्षण सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार चल रहा है, जिसमें छात्रों को अन्य संस्थानों में शिफ्ट करने के विकल्प भी शामिल हैं। एनएमसी जल्द ही नए दिशानिर्देश जारी करेगा, जिनमें मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से दूर रहने और सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाने की सख्त हिदायत होगी।

धमाके के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और NIA अब तक कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें मुजम्मिल गनई, अदील राथर, शाहीना सईद, मौलवी इरफान वागे, आमिर राशिद अली और जसीर बिलाल वानी शामिल हैं। कार चला रहे डॉ. उमर-उन-नबी ने अली के नाम पर वाहन खरीदा था। इस विस्फोट में 15 लोगों की जान गई थी।