अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार को प्रभावित किया है। संस्था ने 2026 के लिए वैश्विक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया है, जो पहले 3.3% आंका गया था। यह 2025 के अनुमानित 3.4% से भी कम रहेगा, जिससे साफ है कि आर्थिक गति धीमी पड़ रही है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव, ने ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े खतरे और तेल रिफाइनरियों पर हमलों के चलते कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ा है, जिसके चलते IMF ने 2026 के लिए वैश्विक मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 4.4% कर दिया है।
IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास के अनुसार, युद्ध से पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर थी, जिसमें तकनीकी क्षेत्र, खासकर AI और डेटा सेंटर में निवेश का बड़ा योगदान था। लेकिन मौजूदा संघर्ष ने इस सकारात्मक रुझान को झटका दिया है।
अगर ऊर्जा संकट लंबा खिंचता है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने को मजबूर होते हैं, तो 2026-27 में वैश्विक वृद्धि दर 2% तक गिर सकती है। अमेरिका की वृद्धि दर भी घटकर 2.3% रहने का अनुमान है, जबकि यूरोप 1.1% की धीमी वृद्धि दर्ज कर सकता है। इसके विपरीत, ऊर्जा निर्यातक होने के कारण रूस को ऊंची कीमतों का लाभ मिल सकता है।









