दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे कम समय पहले आवेदन मिलने और पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया पर भी चर्चा हो रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना किसी सामान्य प्रशासनिक फैसले की तरह नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधारों पर ही पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए साबित दुर्व्यवहार या अक्षमता जैसे निर्धारित आधार जरूरी हैं। केवल किसी राजनीतिक दल का विरोध प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग या सरकार का फैसला उन्हें पद से हटाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
संसद में प्रस्ताव और जांच की प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संसद में प्रस्ताव पेश करने से शुरू होती है। लोकसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। प्रस्ताव स्वीकार होने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपों की जांच की जाती है। जांच में मुख्य चुनाव आयुक्त को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाता है। यदि आरोप साबित नहीं होते हैं, तो हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती।
दोनों सदनों में विशेष बहुमत अनिवार्य
यदि जांच में आरोप साबित हो जाते हैं, तो संसद के दोनों सदनों में हटाने का प्रस्ताव निर्धारित विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है। इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई का समर्थन आवश्यक होता है। दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा करना है।
क्या प्रदर्शन से हटाया जा सकता है मुख्य चुनाव आयुक्त?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए जा सकते हैं और जवाबदेही की मांग की जा सकती है, लेकिन प्रदर्शन मात्र से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संवैधानिक आधार, निर्धारित जांच और संसद के दोनों सदनों की मंजूरी आवश्यक है। ऐसे में CJP के प्रदर्शन के बीच मुख्य सवाल यही है कि मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जवाबदेही किस तरह तय की जाती है।


