देश में मरीजों के लिए अस्पताल चुनना आसान बनाने की दिशा में सरकार एक नई व्यवस्था पर काम कर रही है। नीति आयोग राष्ट्रीय स्तर का क्वालिटी फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है, जिसके तहत सरकारी और निजी अस्पतालों की गुणवत्ता की ग्रेडिंग की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को अस्पतालों की सेवाओं और सुरक्षा से जुड़ी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। ग्रेडिंग प्रक्रिया अगले वित्त वर्ष से शुरू होने की संभावना है।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क में अस्पतालों को कई महत्वपूर्ण मानकों पर परखा जाएगा। इनमें मरीजों की सुरक्षा, दवाओं में होने वाली गलतियां, इलाज के बाद मरीजों का अनुभव और दोबारा अस्पताल में भर्ती होने की दर शामिल हो सकती है। इसके अलावा कैंसर सर्जरी के बाद मृत्यु दर और अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीजों के जीवित रहने की दर जैसे क्लिनिकल आंकड़ों को भी महत्व दिया जाएगा। नीति आयोग इस साल के अंत तक फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ चर्चा की जा रही है।
भारत में फिलहाल एनएबीएच जैसे मानकों के जरिए अस्पतालों की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है, लेकिन इनसे जुड़ी विस्तृत जानकारी आम मरीजों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होती। प्रस्तावित सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे अस्पतालों को अपनी सेवाओं में सुधार के लिए प्रोत्साहन मिलने के साथ स्वास्थ्य बीमा कंपनियों और मेडिकल टूरिज्म क्षेत्र को भी फायदा होने की उम्मीद है।


