पाकिस्तान के लाहौर शहर में करीब आठ दशक बाद इतिहास को फिर से जीवित करने की कोशिश शुरू हुई है। बंटवारे के बाद जिन सड़कों, चौकों और इलाकों के नाम बदलकर इस्लामी या पाकिस्तानी पहचान से जोड़े गए थे, अब उन्हें उनके पुराने ऐतिहासिक नाम वापस दिए जा रहे हैं। पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री Maryam Nawaz की सरकार ने इस योजना को मंजूरी दी है, जिसके बाद शहर में पुराने नामों वाले साइन बोर्ड भी लगाए जाने लगे हैं।
यह पहल ‘लाहौर अथॉरिटी फॉर हेरिटेज रिवाइवल’ (LAHR) अभियान के तहत शुरू की गई है। लगभग 50 अरब पाकिस्तानी रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य लाहौर की विभाजन-पूर्व सांस्कृतिक विरासत को फिर से सामने लाना है। इस अभियान के संरक्षक पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Nawaz Sharif हैं।
योजना के तहत कई चर्चित इलाकों के पुराने नाम बहाल कर दिए गए हैं। इस्लामपुरा अब फिर से कृष्ण नगर कहलाएगा, जबकि बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर जैन मंदिर चौक कर दिया गया है। सुन्नतनगर को संत नगर, मुस्तफाबाद को धरमपुरा और मौलाना जफर अली खान चौक को फिर से लक्ष्मी चौक कहा जाएगा। इसी तरह अल्लामा इकबाल रोड को जेल रोड, फातिमा जिन्ना रोड को क्वींस रोड और बाग-ए-जिन्ना को एक बार फिर लॉरेंस गार्डन नाम दिया गया है।
लाहौर के ऐतिहासिक मिंटो पार्क को भी पुराने स्वरूप में लौटाने की तैयारी हो रही है। यहां तीन क्रिकेट मैदानों और पारंपरिक कुश्ती अखाड़े के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। कभी यह मैदान क्रिकेट और कुश्ती की गतिविधियों का बड़ा केंद्र हुआ करता था। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान Inzamam-ul-Haq समेत कई खिलाड़ियों ने यहां अभ्यास किया था, जबकि विभाजन से पहले भारतीय क्रिकेटर Lala Amarnath भी इसी इलाके के क्लबों से जुड़े रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाहौर की बहु-सांस्कृतिक पहचान और साझा इतिहास को फिर से स्वीकार करने की कोशिश भी है।









