केंद्र सरकार पेंशन सेक्टर में बड़ा सुधार करने की तैयारी में है। सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी Foreign Direct Investment की सीमा को मौजूदा 49% से बढ़ाकर 100% तक करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस बदलाव को लागू करने के लिए आगामी मानसून सत्र में संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस कदम का मकसद पेंशन सेक्टर में विदेशी पूंजी आकर्षित करना, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और नई तकनीक व बेहतर योजनाओं को बढ़ावा देना है, जिससे ग्राहकों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है। यह प्रस्ताव बीमा सेक्टर के समान हो सकता है, जहां पहले ही 100% FDI की अनुमति दी जा चुकी है।
इस बदलाव के लिए Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) अधिनियम, 2013 में संशोधन किया जा सकता है। साथ ही, National Pension System Trust को PFRDA से अलग करने का प्रावधान भी बिल में शामिल हो सकता है, ताकि इसे एक स्वतंत्र और सक्षम बोर्ड द्वारा संचालित किया जा सके। भारत में National Pension System (NPS) की शुरुआत 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई थी और 2009 से इसे सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक बना दिया गया। यह बदलाव सरकार द्वारा पुराने ‘डिफाइंड बेनिफिट’ सिस्टम से ‘डिफाइंड कंट्रीब्यूशन’ सिस्टम की ओर एक अहम कदम था, जिससे पेंशन बोझ को संतुलित किया जा सके। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत के पेंशन सेक्टर में बड़े निवेश और संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।









