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महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में टकराव, सरकार–विपक्ष आमने-सामने

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल सभी वर्गों की महिलाओं को समान रूप से प्रतिनिधित्व नहीं देता। उनका तर्क था कि जब तक पिछड़े वर्गों और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान नहीं किए जाते, तब तक इस पहल को अधूरा माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से लंबित प्रस्तावों को लागू करना अधिक उचित होगा।

इस पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी महिलाओं को समान अवसर देना है, न कि किसी विशेष समुदाय को अलग से लाभ पहुंचाना।

वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना व्यापक सामाजिक आंकड़ों के यह कदम अधूरा है। उन्होंने जाति जनगणना की मांग दोहराते हुए कहा कि इससे वास्तविक प्रतिनिधित्व का रास्ता साफ होगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा कि सरकार जाति जनगणना के मुद्दे पर आगे बढ़ रही है और जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के दायरे में रहकर ही सभी फैसले लिए जाएंगे।

बहस के दौरान अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं देश की “आधी आबादी” में शामिल नहीं हैं। इस पर अमित शाह ने व्यंग्य करते हुए कहा कि राजनीतिक दल चाहें तो अपने स्तर पर टिकट वितरण में बदलाव कर सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।