दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस याचिका पर सोमवार को प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य आरोपियों को निचली अदालत द्वारा दिए गए आरोपमुक्ति के फैसले को चुनौती दी गई है। यह सुनवाई सोमवार दोपहर 2:30 बजे निर्धारित थी, लेकिन तय समय पर अदालत की कार्यवाही शुरू नहीं हो पाई।
सूत्रों के अनुसार, मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा उस दिन अदालत में मौजूद नहीं थीं, जिसके चलते सुनवाई को आगे बढ़ाना पड़ा। इस वजह से CBI की याचिका पर कोई बहस या कार्यवाही नहीं हो सकी और मामला फिलहाल टल गया है। अब सभी पक्ष अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें आरोपमुक्ति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
इससे पहले 20 अप्रैल को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उनके समक्ष से खुद को अलग करने की मांग की थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने अदालत को पत्र लिखकर कहा था कि वे अब व्यक्तिगत रूप से या अपने वकीलों के माध्यम से न्यायाधीश के सामने पेश नहीं होंगे और महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का पालन करेंगे। इसी प्रकार का पत्र आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक की ओर से भी भेजा गया था।
पिछली सुनवाई में अदालत ने यह भी कहा था कि उसे निचली अदालत से आवश्यक रिकॉर्ड पूरी तरह प्राप्त नहीं हुए हैं, जिनमें कुछ महत्वपूर्ण आदेश भी शामिल हैं। इसी कारण सुनवाई पहले भी स्थगित की गई थी। अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित रिकॉर्ड जल्द से जल्द मंगवाए जाएं ताकि मामले की नियमित सुनवाई आगे बढ़ सके। इसके साथ ही अदालत ने कुछ आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए समय सीमा निर्धारित की है। अब यह मामला आगे की सुनवाई में निर्णायक मोड़ ले सकता है।









