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स्पैम कॉल पर TRAI का शिकंजा, AI से होगी संदिग्ध नंबरों की पहचान

स्पैम कॉल से परेशान मोबाइल यूजर्स के लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने नियमों को और सख्त किया है। नए बदलावों का उद्देश्य अनचाही व्यावसायिक कॉल और मैसेज करने वाले नंबरों की पहचान तेजी से करना और टेलीकॉम कंपनियों के बीच संदिग्ध नंबरों की जानकारी साझा कर कार्रवाई को आसान बनाना है।

नए सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से संदिग्ध नंबरों की पहचान की जाएगी। अगर किसी Sender के खिलाफ 10 दिनों में अलग-अलग लोगों से शिकायतें आती हैं और उसके किसी नंबर को AI सिस्टम भी संदिग्ध मानता है, तो कार्रवाई की जा सकती है। कुछ परिस्थितियों में 10 दिनों में पांच शिकायतें मिलने पर भी टेलीकॉम संसाधनों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

ऐप या ऑटोमेटेड सिस्टम से ग्राहकों को कॉल करने वाली कंपनियों को पहले से संबंधित नंबरों की जानकारी टेलीकॉम कंपनी को देनी होगी। वहीं, ग्राहक ने खुद किसी सेवा या जानकारी के लिए अनुरोध किया है तो कंपनी जवाब दे सकती है, लेकिन इसके लिए डिजिटल या लिखित रिकॉर्ड जरूरी होगा।

गलत इस्तेमाल पाए जाने पर संबंधित नंबर या मैसेज टेम्पलेट को बंद किया जा सकता है। टेलीमार्केटर की भूमिका सामने आने पर उसके दूसरे नंबरों पर भी कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग संभव है। TRAI ने 1600 और 1601 सीरीज को सर्विस और ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल के लिए निर्धारित किया है। इसलिए केवल नंबर देखकर वैध कॉल को स्पैम समझना उचित नहीं है। स्पैम कॉल या मैसेज मिलने पर 1909, DND ऐप या टेलीकॉम कंपनी के ऐप/वेबसाइट से शिकायत की जा सकती है। UCC की शिकायत आम तौर पर सात दिनों के भीतर करनी होती है।