पंजाब कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी को खत्म करने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने संगठन के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर मौजूदा राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा की। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा इन बैठकों में शामिल नहीं हुए, जिससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि दोनों नेता फिलहाल दिल्ली में हैं।
इस बीच पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि भूपेश बघेल का दौरा पार्टी के नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और छोटे-मोटे मतभेदों को दूर करने के उद्देश्य से है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी नेताओं के बीच बातचीत के जरिए मतभेद समाप्त किए जाएंगे और पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ेगी। बाजवा ने कहा कि हर राजनीतिक दल और परिवार में विचारों का मतभेद हो सकता है, लेकिन संवाद के माध्यम से उसका समाधान संभव है।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बैठक में शामिल न होने पर प्रताप बाजवा ने कहा कि वे किसी से भी मुलाकात करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें पार्टी की मर्यादा और अनुशासन का पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से ही निकलता है, टकराव से नहीं। भूपेश बघेल ने मंगलवार को पंजाब कांग्रेस भवन में पार्टी के तीनों कार्यकारी अध्यक्षों, महासचिवों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा की। इसके अलावा जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ भी बैठक कर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और 2027 के विधानसभा चुनावों की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।


