मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड देने की घोषणा की है। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड ट्रांसफर माना जा रहा है, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।
आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की बैठक में इस राशि को मंजूरी दी गई। बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि इस बार डिविडेंड 2.5 से 2.7 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकता है, लेकिन RBI ने अनुमान से कहीं अधिक राशि देकर सभी को चौंका दिया। इससे पहले पिछले वर्ष केंद्रीय बैंक ने 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था।
आरबीआई की इस बड़ी कमाई के पीछे विदेशी मुद्रा भंडार का बेहतर प्रबंधन अहम कारण माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने डॉलर की खरीद-बिक्री, विदेशी बॉन्ड में निवेश और मुद्रा प्रबंधन के जरिए अच्छा मुनाफा कमाया। रुपये को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों से भी RBI को फायदा हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अतिरिक्त आय से सरकार को कई मोर्चों पर राहत मिलेगी। इससे राजकोषीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी और सरकार बिना ज्यादा कर्ज लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सड़क और रक्षा परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा सकेगी। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के दबाव के बीच यह रकम आम लोगों के लिए राहतकारी योजनाओं को जारी रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकती है।









