केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक को सरकार के आगामी प्रशासनिक एजेंडे और दीर्घकालिक सुधारों की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिव अपने-अपने विभागों की उपलब्धियों, चल रही परियोजनाओं और सुधारों की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति देंगे। साथ ही, आम जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए नई रणनीतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि बैठक का मुख्य फोकस ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को आगे बढ़ाना होगा। प्रधानमंत्री अधिकारियों से शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दे सकते हैं। इसके अलावा ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े सुधारों की समीक्षा करते हुए अगले चरण के सुधारों का खाका भी तैयार किया जा सकता है।
बैठक ऐसे समय हो रही है जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन कर रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर उम्मीद से बेहतर रही है। ऐसे में सरकार आर्थिक गति को बनाए रखने, निवेश बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और सरल बनाने पर विशेष ध्यान दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री सचिवों को लंबित परियोजनाओं के शीघ्र निष्पादन, नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और समयबद्ध कार्य संस्कृति अपनाने के निर्देश दे सकते हैं। कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच आयोजित यह बैठक सरकार की भविष्य की प्राथमिकताओं और सुधार एजेंडे को स्पष्ट करने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


