कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बैठक में बुलाया गया। SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और जरूरी सुधार करना है। विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि SIR के दौरान मतदाताओं से कौन से दस्तावेज और घोषणाएं मांगी जा रही हैं तथा नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है।
CWC में खरगे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है और इससे मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी उठाई। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े आदेश संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। आयोग ने Form-6 को लेकर भी स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के तहत अतिरिक्त घोषणा का प्रावधान जोड़ा गया है।
कांग्रेस ने मतदाता सूची से जुड़े पूरा डेटा सार्वजनिक करने, नाम हटाने से पहले सूचना और अपील का अवसर देने, राजनीतिक दलों को डेटा उपलब्ध कराने और गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र जांच कराने जैसी मांगें रखी हैं। इस विवाद में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता अधिकार और डेटा पारदर्शिता जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं। आगे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मामले को किस स्तर तक ले जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।


