अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। चार्जशीट में चोरी के तरीके, आरोपियों की भूमिका और बरामद रकम से जुड़े कई अहम तथ्य सामने रखे गए हैं। जांच के मुताबिक, मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी का मामला जून के शुरुआती दिनों में सामने आया था। गणना कक्ष में तैनात कर्मचारियों ने कुछ संदिग्ध लोगों को नकदी छिपाते हुए पकड़ा था। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई, जिसके दौरान आरोपियों द्वारा शौचालय में छिपाई गई लाखों रुपये की नकदी भी बरामद की गई।
SIT ने मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की। इसमें मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला समेत अन्य आरोपियों की कथित गतिविधियां सामने आईं। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कम समय की नौकरी के दौरान कई बार चढ़ावे की रकम में सेंध लगाई। चार्जशीट में सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार, दानपात्र से प्राप्त रकम को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी उनके पास थी। पुलिस का दावा है कि उन्होंने अन्य आरोपियों की मदद की, जिससे सुरक्षा जांच में उन्हें आसानी हुई।
SIT ने मामले की जांच के दौरान कुल 133 लोगों के बयान दर्ज कर उन्हें गवाह बनाया है। इनमें मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, पुलिसकर्मी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आपराधिक साजिश में शामिल नहीं पाया और उन्हें गवाह बनाया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं, जबकि उनके बैंक खातों में लगभग एक करोड़ रुपये के लेन-देन और जमा राशि की जानकारी मिली है। आठ मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।


