जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सात दिवसीय सत्र हंगामे के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विपक्षी विधायकों ने सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुछ विधायकों के बीच धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत सरकार के कई मंत्री सदन में मौजूद रहे।
विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने रोजगार, बिजली, विकास और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने और जनता से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान देने में विफल रही है।
डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि सरकार के मंत्री सभी मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक सरकार का पक्ष सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। चौधरी ने कहा कि सरकार जनकल्याण से जुड़े हर मुद्दे पर गंभीर है और सदन में जवाब देने के लिए तैयार है।
वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि विपक्ष का काम जनता की आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग सरकार से यह जानना चाहते हैं कि उनके लिए किए गए वादों पर कितना काम हुआ है और भविष्य की योजनाएं क्या हैं। सत्र को देखते हुए विधानसभा परिसर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। बीजेपी, PDP और सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है।


