दिल्ली-एनसीआर समेत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नियमों को और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। पर्यावरण मंत्रालय ने पराली जलाने से जुड़े नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं और संबंधित पक्षों से 60 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, जिस खेत में पराली जलाने की घटना सामने आएगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने तक ‘रेड कैटेगरी’ में रखा जाएगा। यदि उसी जमीन पर दोबारा पराली जलाई जाती है या लगाया गया पर्यावरण जुर्माना तय समय में जमा नहीं किया जाता, तो ‘रेड एंट्री’ की अवधि अगले 15 महीने तक बढ़ सकती है।
पराली जलाने पर जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर जुर्माने का प्रावधान पहले की दरों के अनुसार ही रखा गया है। दो एकड़ से कम जमीन पर 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
ड्राफ्ट में जुर्माने से प्राप्त राशि के इस्तेमाल का भी प्रस्ताव है। इस रकम का उपयोग फसल विविधीकरण, बायोमास के उपयोग और भंडारण ढांचे को बढ़ावा देने के साथ फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े शोध एवं विकास कार्यों में किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि सुझावों की समीक्षा के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा


