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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार सख्त, मेटा समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बढ़ेगी जवाबदेही

बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सरकार का जोर अब केवल शिकायत मिलने के बाद आपत्तिजनक कंटेंट हटाने पर नहीं, बल्कि ऐसी सामग्री की पहले से पहचान कर उसे फैलने से रोकने पर है। इसी बीच मेटा ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ साझा करने पर सहमति जताई है। इसे ऑनलाइन बाल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की पड़ताल करने और अपराध से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

सरकार का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सिर्फ माता-पिता, परिवार या स्कूलों की जिम्मेदारी नहीं है। सोशल मीडिया कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सेवाओं का इस्तेमाल बच्चों के शोषण या उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए न किया जाए। सरकार अब प्लेटफॉर्म्स से ऐसे तकनीकी सिस्टम विकसित करने की अपेक्षा कर रही है, जो बच्चों से संबंधित गैरकानूनी या आपत्तिजनक सामग्री को तेजी से पहचान सकें। अधिकारियों की अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ भी बातचीत जारी है।

सरकार का रुख स्पष्ट है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के साथ जरूरत पड़ने पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई भी हो सकती है। आने वाले समय में डिजिटल कंपनियों की जवाबदेही और बढ़ने की संभावना है।