जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन अशदर के तहत हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान से आए आतंकी यासिर को मार गिराया। बताया जा रहा है कि यासिर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा था और लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यासिर का नाम जम्मू-कश्मीर में हुए कम से कम पांच बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा गया था। इन हमलों में सेना और वायुसेना के जवानों के अलावा नागरिक पोर्टरों को भी निशाना बनाया गया था। ऐसे में उसका मारा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम कामयाबी मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, बड़ागांव इलाके के घने जंगलों में आतंकियों के एक बड़े समूह के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन शुरू किया था। पुख्ता इनपुट के आधार पर शुरू हुआ यह अभियान करीब तीन दिनों तक चला। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने यासिर को ढेर कर दिया, जबकि उसके कुछ साथी घने जंगलों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
यासिर को पकड़ने या उसके नेटवर्क का पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पहले से सक्रिय थीं। उसके मारे जाने के बाद इलाके में तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया है। सुरक्षाबल अब जंगल के आसपास के क्षेत्रों में भी सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और फरार आतंकियों की तलाश की जा रही है। यासिर का नाम 4 मई 2024 के पुंछ में वायुसेना के काफिले पर हुए हमले, 11 अक्टूबर 2021 और 20 अप्रैल 2023 के भट्टा दुर्रियां हमलों, 25 अक्टूबर 2024 के बूटा पथरी हमले और 21 दिसंबर 2023 के डेरा की गली हमले से जोड़ा गया था।


