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अल नीनो की वापसी से बढ़ी चिंता, भारत में गर्मी और कम बारिश का खतरा

सर्दियों की दस्तक से पहले ही दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति अब सक्रिय हो चुकी है और इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने समुद्र के असामान्य रूप से बढ़ते तापमान को वैश्विक मौसम के लिए गंभीर संकेत बताया है। WMO के अनुसार, प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका है। सितंबर से नवंबर 2026 के बीच इसका असर खास तौर पर महसूस किया जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 22 अगस्त को वैश्विक समुद्री सतह का औसत तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो महासागरों पर बढ़ते जलवायु दबाव को दर्शाता है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। इस साल 1 जून से 2 सितंबर के बीच देश में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो की सक्रियता से बारिश के वितरण में बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रह सकते हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का असर उत्तर-पूर्वी मानसून पर भी पड़ सकता है। इसके चलते अक्टूबर और नवंबर में भी गर्मी सामान्य से अधिक महसूस हो सकती है, जबकि दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड की संभावना कम हो सकती है।