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घुसपैठ पर अमित शाह का सख्त संदेश, बोले- भारत कोई धर्मशाला नहीं

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश में अवैध घुसपैठ को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में रहने का अधिकार केवल उसके नागरिकों को है। शाह ने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और देश की जनसांख्यिकी के लिए गंभीर चुनौती बताया। खुफिया ब्यूरो (IB) की ओर से आयोजित नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में गृह मंत्री ने यह बात कही। सम्मेलन में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। शाह ने बताया कि पिछले आठ महीनों में सीमा साझा करने वाले राज्यों का दौरा करने के बाद सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ चार सूत्रीय रणनीति साझा की गई है। सरकार का लक्ष्य कम से कम समय में देश को घुसपैठ से मुक्त करना है।

आंतरिक सुरक्षा को लेकर शाह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात, ऊर्जा एवं संसाधनों की असुरक्षा, सप्लाई चेन में रुकावट, कट्टरपंथ और साइबर दुष्प्रचार जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा नीति तैयार करनी होगी। उन्होंने मजबूत आंतरिक सुरक्षा को विकसित भारत की बुनियादी जरूरत बताया। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पूर्वोत्तर में नशीले पदार्थों, उग्रवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो देश को लंबे समय तक इनके दुष्परिणाम नहीं झेलने पड़ते। शाह ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से इन तीनों प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों पर काफी हद तक काबू पाया गया है। ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने अगले 15 से 20 वर्षों के संभावित रुझानों का अध्ययन करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से रणनीति बनाने के निर्देश दिए। साथ ही ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ को लागू करने और ड्रग्स-मुक्त भारत के लिए ‘3D’ यानी Detect, Disrupt और Destroy की रणनीति अपनाने पर जोर दिया।