तुर्की के अखबार ‘येनी शफाक’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित रक्षा सहयोग के ढांचे में बांग्लादेश के शामिल होने की संभावना पर चर्चा हो रही है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ढाका को इस फ्रेमवर्क में शामिल करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल इसे एक संभावित परिदृश्य के तौर पर ही देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बांग्लादेश भविष्य में इस तरह के किसी सुरक्षा या रक्षा ढांचे का हिस्सा बनता है, तो यह उसकी विदेश और सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। ढाका भारत पर अपनी पारंपरिक निर्भरता को कम करते हुए चीन, पश्चिमी देशों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ अपने रणनीतिक विकल्पों का विस्तार कर सकता है।
‘येनी शफाक’ के अनुसार, पाकिस्तान और तुर्की बांग्लादेश के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने में रुचि रखते हैं। खास तौर पर तुर्की की ड्रोन तकनीक और रक्षा उपकरण बांग्लादेश के लिए उपयोगी हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से रक्षा सहयोग बढ़ा है और जून में रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री स्तर की संयुक्त समिति बनाने पर भी सहमति बनी थी। भारत के लिहाज से यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देशों के संबंध व्यापार, सीमा प्रबंधन, नदी जल बंटवारे और बंगाल की खाड़ी जैसे अहम मुद्दों से जुड़े हैं। ऐसे में यदि ढाका किसी नए रक्षा गठजोड़ के करीब जाता है, तो नई दिल्ली को अपनी पूर्वी सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक बांग्लादेश की ओर से इस संभावित गठजोड़ में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


