भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। फैब इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सेमीकंडक्टर डिवाइस और कंपोनेंट्स की खपत 2026 में 54 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 130 अरब डॉलर और 2035 तक 350 अरब डॉलर यानी करीब 33.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रोत्साहन और सब्सिडी देती रहीं, तो भारत न केवल अपनी घरेलू मांग पूरी करने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी मजबूत भूमिका निभाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में भारत चिप निर्माण के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है, लेकिन चरणबद्ध निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ 2035 तक आयात पर निर्भरता में बड़ी कमी आ सकती है। इसके लिए 2030 तक लगभग 40 अरब डॉलर की सब्सिडी वाले तीन इंसेंटिव पैकेज और उसके बाद अतिरिक्त प्रोत्साहन योजनाओं की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बन सकता है, जिससे रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

