भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति शनिवार को एक और बड़ी छलांग लगाने जा रही है। स्वदेशी तकनीक से तैयार अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि (F38) को विशाखापट्टनम में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। यह युद्धपोत भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है।
पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पहाड़ियों के नाम पर बने इस युद्धपोत को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है। प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित इस फ्रिगेट में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
INS महेंद्रगिरि की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक स्टील्थ तकनीक है। यह तकनीक जहाज को दुश्मन के रडार, थर्मल और इंफ्रारेड सेंसर की पकड़ से काफी हद तक बचाने में सक्षम बनाती है, जिससे यह समुद्र में गुप्त रूप से ऑपरेशन चलाकर सटीक हमला कर सकता है। यह युद्धपोत सतह, हवा और समुद्र के भीतर तीनों प्रकार के खतरों से एक साथ निपटने की क्षमता रखता है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, अत्याधुनिक रडार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और पनडुब्बी रोधी हथियारों जैसी आधुनिक सैन्य प्रणालियां शामिल हैं।
भारतीय नौसेना का मानना है कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच INS महेंद्रगिरि एक प्रभावी ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित होगा। यह युद्धपोत समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक अभियानों और आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में भी अहम भूमिका निभाएगा। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में भारत की वैश्विक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।


