“देश में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, एथेनॉल और मेथनॉल जैसे स्वच्छ ईंधन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को अगले 7 वर्षों तक परमिट लेने की आवश्यकता नहीं होगी।” सरकार के इस फैसले का उद्देश्य प्रदूषण कम करना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और परिवहन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस नई व्यवस्था का लाभ इलेक्ट्रिक ट्रक, बसों और मालवाहक कमर्शियल वाहनों को मिलेगा। हालांकि, इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है। जिन वाहनों को यह छूट मिलेगी, उनमें AIS-140 मानक वाला GPS ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगा होना चाहिए, ताकि वाहन की लोकेशन, गति और सुरक्षा की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से वाहन मालिकों को परमिट शुल्क और कागजी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी, जिससे परिवहन व्यवसाय अधिक आसान और किफायती होगा। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों के विकास और निर्माण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने तथा स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में यह कदम भारत के ग्रीन मोबिलिटी मिशन को नई गति देने वाला माना जा रहा है।


