श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक और संवेदनशील विषय को लोगों तक पहुंचने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
गड़गज्ज ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने 1990 के दशक में कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और सिख युवकों की न्यायेतर हत्याओं से जुड़े मामलों को दस्तावेजों के साथ दुनिया के सामने लाने का साहसिक काम किया था। उनके अनुसार, खालड़ा की कहानी मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उजागर करती है और ऐसे तथ्यों को दबाने का प्रयास उचित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि अन्य समुदायों से जुड़े ऐतिहासिक और संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों का प्रदर्शन किया जा सकता है, तो सिख समुदाय के दर्द और संघर्ष को दिखाने वाली फिल्म को रोकना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने केंद्र सरकार से फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने और सच्चाई को लोगों तक पहुंचने देने की अपील की। जत्थेदार ने यह भी कहा कि सच्चाई को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता और अतीत की घटनाओं से जुड़े मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई कर पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्म को हटाए जाने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।


