देश में पेट्रोल के बाद अब डीजल को भी अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि डीजल में सीधे इथेनॉल नहीं मिलाया जा सकता, इसलिए सरकार इथेनॉल से तैयार होने वाले आइसोब्यूटेनॉल को डीजल में मिलाने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार पहले ही देशभर में E20 पेट्रोल लागू कर चुकी है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। अब अगला कदम डीजल के लिए वैकल्पिक बायोफ्यूल तैयार करना है। अधिकारियों के अनुसार, यदि सभी परीक्षण सफल रहे तो 2026 के अंत तक इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। आइसोब्यूटेनॉल एक बायो-अल्कोहल है, जिसे इथेनॉल से तैयार किया जाता है। इसे गन्ने, अनाज और कृषि अवशेषों जैसे बायोमास से भी बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डीजल के साथ बेहतर तरीके से मिश्रित हो जाता है और इसकी ज्वलनशीलता तथा वाष्पीकरण क्षमता इथेनॉल की तुलना में कम होती है, जिससे इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
डीजल इंजन की कार्यप्रणाली पेट्रोल इंजन से अलग होती है। इसमें ईंधन उच्च दबाव के कारण स्वयं प्रज्वलित होता है, इसलिए इसमें सीधे इथेनॉल मिलाने से इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि सरकार आइसोब्यूटेनॉल को विकल्प के रूप में विकसित कर रही है। फिलहाल भारत पेट्रोलियम (BPCL) इस मिश्रण के प्रभावों पर शोध कर रही है। शुरुआती परीक्षणों के परिणाम सकारात्मक बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिश्रित डीजल से माइलेज पर मामूली असर पड़ सकता है, लेकिन इंजन के प्रदर्शन पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। अंतिम फैसला विस्तृत परीक्षणों के बाद ही लिया जाएगा।


