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टीएमसी के बागी बन सकते हैं एनडीए की ताकत? संसद में बदलेगा समीकरण

तृणमूल कांग्रेस के दो दर्जन से अधिक सांसदों के रुख में बदलाव और संभावित समर्थन से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय स्थिति मजबूत होती दिखाई दे रही है। वर्तमान लोकसभा में एनडीए बहुमत के करीब तो है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के महत्वपूर्ण आंकड़े से अभी दूर है, जो संविधान संशोधन जैसे विधेयकों के लिए जरूरी होता है। अप्रैल में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका था, जिसके कारण वह पारित नहीं हो पाया।

हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद एनडीए को लगभग 20 से अधिक अतिरिक्त सांसदों का समर्थन मिलने की चर्चा है, जिससे गठबंधन की संख्या 300 के पार पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके अलावा द्रमुक (डीएमके) के सांसदों से भी मुद्दों के आधार पर समर्थन की संभावना को लेकर बातचीत जारी बताई जा रही है। यदि यह समर्थन मिल जाता है तो एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है और वह दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकता है। सरकार आगामी मानसून सत्र में कई अहम विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिनमें महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने का संशोधन और “एक देश, एक चुनाव” जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके लिए सरकार संसद में मजबूत संख्या बल जुटाने पर जोर दे रही है।

लोकसभा में कुल 543 सीटों में से प्रभावी बहुमत का गणित खाली सीटों को घटाकर बदला हुआ है। वर्तमान राजनीतिक समीकरण में एनडीए की नजर छोटे दलों, निर्दलीयों और संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी है। राज्यसभा में भी समर्थन बढ़ाने की रणनीति पर काम चल रहा है, जहां गठबंधन पहले से मजबूत स्थिति में बताया जा रहा है। सरकार का फोकस स्पष्ट बहुमत के साथ प्रमुख नीतिगत और संवैधानिक प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।