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क्या टीएमसी में होने वाली है बड़ी टूट? सुखेंदु रॉय के बयान से मचा सियासी भूचाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। लंबे समय तक पार्टी नेतृत्व का समर्थन करने वाले कई नेता अब खुलकर आलोचना कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी झटके के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व और संगठन को लेकर गंभीर मतभेद उभर रहे हैं।

इस बीच टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी की स्थिति पर चिंता जताते हुए बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि पार्टी लगातार कमजोर हो रही है और आने वाले समय में इसका असर संगठनात्मक ढांचे पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की स्वीकार्यता पहले जैसी नहीं रही और अन्य राजनीतिक दल भी उससे दूरी बना रहे हैं।

पार्टी के भीतर असंतोष केवल नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायकों के बीच भी मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हाल के घटनाक्रम में बड़ी संख्या में विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में खड़े होने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि दर्जनों विधायकों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है, जिससे विधानसभा में टीएमसी के भीतर स्पष्ट गुटबाजी नजर आने लगी है।

ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उनके समर्थक विधायकों ने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता चुनने का फैसला भी किया है। साथ ही समर्थन पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे जाने की बात भी कही जा रही है।

इन घटनाओं ने टीएमसी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी नेतृत्व के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना और बढ़ती नाराजगी को नियंत्रित करना होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह असंतोष आगे भी जारी रहा तो आने वाले समय में पार्टी की स्थिति और अधिक प्रभावित हो सकती है।