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कोरोना वैक्सीन के बाद इबोला पर वार करेगी भारतीय कंपनी, 200 से ज्यादा मौतों के बीच शुरू हुआ बड़ा मिशन

दुनिया के कई देशों में इबोला वायरस का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से अफ्रीका के कुछ हिस्सों में संक्रमण के मामलों और मौतों में वृद्धि ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी चुनौती से निपटने के लिए महामारी-रोधी वैश्विक संस्था CEPI (कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस) ने इबोला वैक्सीन के विकास हेतु 60 मिलियन डॉलर (करीब 570 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।

रिपोर्टों के अनुसार, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा सहित पूर्वी अफ्रीका के कई क्षेत्रों में इबोला वायरस का बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है। अब तक इस संक्रमण से 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 900 से ज्यादा लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।

CEPI द्वारा जारी फंड का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना को दिया गया है। इसके अलावा ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) को संयुक्त रूप से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। दोनों संस्थान मिलकर ChAdOx1 Bundibugyo नामक वैक्सीन विकसित करेंगे, जो कोविड-19 के दौरान उपयोग में लाई गई ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका तकनीक पर आधारित होगी।

वहीं, इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव (IAVI) भी एक सिंगल-डोज वैक्सीन विकसित करेगा। यह तकनीक मर्क की प्रसिद्ध Ervebo वैक्सीन से प्रेरित है, जिसने पहले इबोला के ज़ायरे स्ट्रेन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इबोला संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर आर्थिक सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है। Gavi और विश्व बैंक के Pandemic Fund समेत कई संस्थाओं ने करोड़ों डॉलर की सहायता का ऐलान किया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक प्रयासों से इस घातक बीमारी पर जल्द नियंत्रण पाया जा सकेगा।