केंद्र सरकार ने आयकर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से PAN Card से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किया है। ये नए प्रावधान 1 जून 2026 से लागू हो गए हैं और इनका प्रभाव नए पैन आवेदन, संशोधन प्रक्रिया तथा बड़े वित्तीय लेन-देन पर पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन बनवाने की सुविधा समाप्त कर दी गई है। नए आवेदन या पैन में सुधार के लिए जन्मतिथि प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट या वोटर आईडी जैसे अतिरिक्त दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, पैन आवेदन के लिए इस्तेमाल होने वाले पुराने Form 49A और 49AA को बंद कर दिया गया है। उनकी जगह चार नए फॉर्म लागू किए गए हैं, जो भारतीय नागरिकों, कंपनियों, विदेशी नागरिकों और विदेशी संस्थाओं के लिए अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं। वेरिफिकेशन प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड बनाया गया है। अब आवेदन में दर्ज नाम, जन्मतिथि और अन्य विवरण आधार रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाने चाहिए। किसी भी प्रकार की स्पेलिंग या डेटा की छोटी गलती आवेदन को अस्वीकार कर सकती है।
सरकार ने कुछ लेन-देन में राहत भी दी है। संपत्ति खरीद-बिक्री में पैन की अनिवार्यता की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है। वहीं, महंगे वाहनों की खरीद पर पैन की आवश्यकता से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है। इसके साथ ही, Form 60 की जगह नया Form 97 लागू किया गया है। बैंकिंग लेन-देन में भी निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिसके तहत बड़े कैश डिपॉजिट और निकासी पर विशेष नजर रखी जाएगी। नए नियमों का उद्देश्य टैक्स अनुपालन बढ़ाना, फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना और वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाना है।









