Delhi

दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: टीवी चैनलों पर विज्ञापन सीमा लागू, ट्राई का 10+2 मिनट नियम बरकरार

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में टेलीविजन प्रसारण से जुड़े विज्ञापन नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर असीमित व्यावसायिक लाभ का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इस निर्णय के साथ टेलीविजन चैनलों पर प्रति घंटे 12 मिनट (10+2 मिनट) तक विज्ञापन प्रसारण की सीमा लागू रहेगी।

यह मामला Telecom Regulatory Authority of India के 2012 के “सेवा की गुणवत्ता मानक (टेलीविजन चैनलों में विज्ञापनों की अवधि) विनियम” से जुड़ा था, जिसमें प्रसारणकर्ताओं के लिए विज्ञापनों की अधिकतम समय सीमा तय की गई थी। कई सामान्य मनोरंजन चैनलों, समाचार प्रसारकों और क्षेत्रीय चैनलों ने इन नियमों को चुनौती देते हुए कहा था कि ट्राई के पास विज्ञापनों की अवधि तय करने का अधिकार नहीं है और इससे उनके राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि विज्ञापन समय को नियंत्रित करना प्रसारकों के व्यावसायिक अधिकारों में हस्तक्षेप है और इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम बाजार की स्वतंत्रता और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है।

हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि ट्राई ने अपने वैधानिक अधिकार क्षेत्र में रहते हुए यह नियम बनाए हैं। अदालत के अनुसार, यह व्यवस्था प्रसारकों के अधिकारों और जनहित के बीच संतुलन स्थापित करती है तथा प्रसारण स्पेक्ट्रम के कुशल और निष्पक्ष उपयोग को सुनिश्चित करती है।

फैसले में यह भी कहा गया कि संविधान सार्वजनिक संसाधनों के अनियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की गारंटी नहीं देता। इस निर्णय से देश के टीवी प्रसारण क्षेत्र में विज्ञापन समय सीमा को लेकर चल रही बहस को स्पष्ट कानूनी दिशा मिल गई है।