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‘जोरावर’ लाइट टैंक बनेगा हाई-एल्टीट्यूड युद्ध का नया ढाल, थर्मल कैमरों को देगा चकमा

भारत का स्वदेशी हल्का युद्धक टैंक ‘जोरावर’ अब एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने जा रहा है, जो इसे दुश्मन के थर्मल कैमरों और ड्रोन-आधारित निगरानी से काफी हद तक अदृश्य बना सकती है। DRDO और Larsen & Toubro (L&T) द्वारा विकसित यह 25 टन का लाइट टैंक खास तौर पर लद्दाख और उत्तरी सीमाओं जैसे ऊंचाई वाले और कठिन इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पारंपरिक टैंक अक्सर अपनी थर्मल पहचान के कारण आसानी से पकड़े जाते हैं।

नई Adaptive Thermal Camouflage System की मदद से टैंक अपनी बाहरी सतह के तापमान को आसपास के वातावरण के अनुरूप नियंत्रित कर सकेगा। यह सिस्टम लगातार सेंसरों के जरिए तापमान की निगरानी करेगा और जरूरत के अनुसार हीटिंग या कूलिंग को एडजस्ट करेगा, जिससे टैंक का थर्मल सिग्नेचर काफी हद तक छिपा रहेगा। अनुमान है कि यह तकनीक टैंक के तापमान को परिवेश से लगभग ±3°C के भीतर बनाए रख सकती है।

इस सिस्टम में FPGA-आधारित माइक्रोकंट्रोलर, Peltier कूलिंग तकनीक और conductive ink जैसे आधुनिक घटकों का उपयोग किया गया है। हल्के मटेरियल से बने मॉड्यूलर पैनल इसे अतिरिक्त वजन से बचाते हैं और कठिन मौसम (-30°C से 50°C) में भी काम करने में सक्षम बनाते हैं।

105mm गन से लैस यह टैंक ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्रों में बेहतर गतिशीलता और सुरक्षा प्रदान करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, सफल परीक्षणों के बाद 2026–27 में सीमित उत्पादन और 2027–28 तक बड़े पैमाने पर सेना में शामिल किए जाने की संभावना है। यह तकनीक भारत की हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर क्षमता को एक नई रणनीतिक बढ़त दे सकती है।