हरियाणा सरकार ने राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस नीति की घोषणा की थी, जिसे अब अंतिम रूप दे दिया गया है। नीति को केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी योजनाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि हरियाणा देश के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में अपनी मजबूत हिस्सेदारी दर्ज करा सके।
नई नीति के तहत गुरुग्राम-मेवात बेल्ट को प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना है। आईएमटी सोहना में लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, मजबूत सड़क नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक बनाते हैं।
नीति के तहत उद्योगों को 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपये प्रति इकाई तय की गई है। इसके अलावा 20 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तक परिचालन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने का भी प्रावधान किया गया है।
इस नीति से मोबाइल कंपोनेंट, पीसीबी असेंबली, बैटरी पैक, डिस्प्ले यूनिट और ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है। साथ ही स्टार्टअप, एमएसएमई और आरएंडडी सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम हरियाणा को आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय केंद्र बना सकता है।









