एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के सचिव अजय सहगल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है, क्योंकि जांच अब केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रहकर पूरे मंजूरी सिस्टम और संबंधित विभागों तक पहुंच गई है। ईडी का आरोप है कि किसानों और जमीन मालिकों के फर्जी सहमति पत्र तैयार कर लगभग 30.5 एकड़ जमीन के लिए क्लियरेंस (सीएलयू) हासिल किया गया। जांच में सामने आया है कि 15 जमीन मालिकों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठों का इस्तेमाल किया गया, जिसके आधार पर सनटेक सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और बाद में करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा किया गया।
जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी अनियमितताओं के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आशंका जताई जा रही है कि मंजूरी प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर मिलीभगत हुई और कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर लाभ लेकर नियमों को नजरअंदाज किया। इसी कारण जीएमएडीए और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के कुछ अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत पंजाब पुलिस में दर्ज एक एफआईआर से हुई थी, जिसमें किसानों ने आरोप लगाया था कि उनकी जानकारी के बिना जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की।
ईडी ने 7 मई को कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां एक जगह से बालकनी से 21 लाख रुपये नकद फेंकने का मामला भी सामने आया था। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ प्रोजेक्ट्स की बिक्री रेरा मंजूरी से पहले ही शुरू कर दी गई थी और ईडब्ल्यूएस प्लॉट अब तक संबंधित विभाग को ट्रांसफर नहीं किए गए। फिलहाल ईडी बैंक लेन-देन, संपत्ति रिकॉर्ड और मंजूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे और पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।









