हरियाणा नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ एक बार फिर साबित कर दी है। दस मई को हुए मतदान के बाद घोषित परिणामों में भाजपा ने छह जिलों की सात प्रमुख निकाय सीटों में से छह पर जीत दर्ज कर विपक्ष को बड़ा झटका दिया। इस जीत को मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के नेतृत्व, बूथ स्तर तक मजबूत संगठन और आक्रामक चुनावी रणनीति की सफलता माना जा रहा है।
भाजपा ने अंबाला, पंचकूला और सोनीपत नगर निगमों में महापौर पद पर जीत हासिल की। अंबाला में अक्षिता सैनी ने बड़ी जीत दर्ज की, जहां बीस में से सोलह वार्ड भाजपा के खाते में गए। पंचकूला में श्याम लाल बंसल ने महापौर पद जीता और पार्टी ने बीस में से सत्रह वार्डों पर कब्जा जमाया। सोनीपत में भाजपा उम्मीदवार राजीव जैन ने महापौर चुनाव जीता, हालांकि वार्ड स्तर पर कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाईस में से सत्रह सीटें हासिल कीं।
रेवाड़ी नगर परिषद में भाजपा उम्मीदवार वनीता पीपल ने अध्यक्ष पद जीता, जबकि वार्ड चुनावों में निर्दलीयों का दबदबा रहा। धारूहेड़ा नगरपालिका में भाजपा उम्मीदवार सत्यनारायण उर्फ अजय जांगड़ा ने भारी मतों से जीत दर्ज की। सांपला नगरपालिका में भी भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत गढ़ में अध्यक्ष पद जीतकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। वहीं उकलाना नगरपालिका में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए और पूरे राज्य में लगभग 54.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। रोहतक में सबसे अधिक 79.2 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि उकलाना और रेवाड़ी में भी मतदाताओं ने उत्साह के साथ मतदान किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की बूथ प्रबंधन क्षमता, सक्रिय कार्यकर्ता नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ ने विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया। कई क्षेत्रों में पार्टी ने लगभग नब्बे प्रतिशत वार्ड सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी चुनावी मशीनरी की ताकत दिखाई।
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए ये परिणाम चिंतन का विषय बन गए हैं। पार्टी नेता Bhupinder Singh Hooda ने बेहतर प्रदर्शन का दावा जरूर किया, लेकिन लगातार चुनावी हारों के पीछे संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक गुटबाजी को बड़ा कारण माना जा रहा है। चुनाव से पहले Rahul Gandhi की गुरुग्राम पदयात्रा भी राजनीतिक माहौल बदलने में असरदार साबित नहीं हो सकी। हरियाणा निकाय चुनावों के नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि राज्य में भाजपा फिलहाल मजबूत राजनीतिक बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस को संगठन और नेतृत्व दोनों स्तरों पर नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी।









