टाटा ग्रुप अब सिर्फ स्टील और ऑटोमोबाइल तक सीमित नहीं रहकर टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने बेहद कम समय में उल्लेखनीय विकास करते हुए खुद को भारत की प्रमुख चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल कर लिया है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में करीब 30 अरब डॉलर (लगभग 2.8 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार हासिल करना है।
कुछ साल पहले लगभग 400 करोड़ रुपये से शुरू हुई यह कंपनी आज 1.3 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू रन रेट तक पहुंच चुकी है। इस तेज़ वृद्धि में टाटा ग्रुप की अन्य कंपनियों का सहयोग और मजबूत कॉरपोरेट इकोसिस्टम अहम रहा है। आज कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 15 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। गुजरात के धोलेरा में देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब लगभग 91,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है, जबकि असम में 27,000 करोड़ रुपये की पैकेजिंग यूनिट विकसित हो रही है। इन परियोजनाओं में सरकार की सब्सिडी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कंपनी पहले ही इंटेल, क्वालकॉम, बॉश और रोहम जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी कर चुकी है, जिससे इसकी 70% उत्पादन क्षमता पहले से बुक है। तीन साल पहले घाटे में रहने वाली कंपनी अब 4000 करोड़ रुपये से अधिक EBITDA के साथ लाभ में पहुंच चुकी है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की रणनीति तीन स्तंभों—टेक्नोलॉजी, टैलेंट और कैपिटल—पर आधारित है। कंपनी न केवल भारत बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे यह आने वाले समय में एक वैश्विक सेमीकंडक्टर लीडर बन सकती है।









