जम्मू-कश्मीर में नशे और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उपराज्यपाल Manoj Sinha ने 100 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की है। ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश को ड्रग्स की समस्या से मुक्त करना और इसके पीछे सक्रिय संगठित नेटवर्क को खत्म करना है। अभियान की शुरुआत जम्मू के एमए स्टेडियम से एक भव्य पदयात्रा के साथ की गई, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों—युवा, छात्र, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट्स एंड गाइड्स और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी देखी गई। यह पदयात्रा लगभग 1900 मीटर लंबी रही और इसका संदेश पूरे राज्य में फैलाने की योजना है।
उपराज्यपाल ने इस अभियान को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने “निर्दोष को न छुएं, दोषी को न बख्शें” की नीति के तहत ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और पीड़ितों के पुनर्वास की बात भी कही। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में नार्को-टेररिज्म एक गंभीर चुनौती बन चुका है। अनुमान है कि करीब 5000 करोड़ रुपये का यह अवैध कारोबार सीमा पार से संचालित हो रहा है, जिसमें ड्रोन के जरिए हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थ गिराए जा रहे हैं। एक खेप की कीमत 10 से 40 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के लिए भी किया जा रहा है। तस्करी का यह पूरा सिस्टम बेहद संगठित है, जिसमें स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के नेटवर्क शामिल हैं। जम्मू और श्रीनगर को ड्रग तस्करी के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। हाल के वर्षों में एनडीपीएस मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जबकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ कर सैकड़ों गिरफ्तारियां की हैं और करोड़ों की हेरोइन जब्त की है। सरकार का दावा है कि यह 100 दिवसीय अभियान न केवल ड्रग तस्करी पर लगाम लगाएगा, बल्कि युवाओं को सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।









