ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद जहां बाहरी तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, वहीं देश के भीतर सत्ता को लेकर असमंजस गहराता जा रहा है। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पिछले करीब 40 दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे उनकी स्थिति और भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वे कोम में इलाज के दौरान बेहोशी की हालत में हैं और शासन के फैसलों में शामिल नहीं हो पा रहे। यदि यह सच है, तो ईरान फिलहाल नेतृत्व के अभाव जैसी स्थिति से गुजर रहा है। अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन जल्द ही उनकी सेहत को लेकर आई खबरों ने पूरे सिस्टम को अस्थिर बना दिया। उनकी अनुपस्थिति ने ‘शैडो लीडरशिप’ की चर्चाओं को जन्म दिया है, जिसमें रिवोल्यूशनरी गार्ड, धार्मिक परिषद और खामेनेई परिवार के करीबी लोगों की भूमिका अहम मानी जा रही है।
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद आजीवन होता है, लेकिन यदि नेता अक्षम हो, तो Assembly of Experts नया नेता चुन सकती है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मोजतबा को हटाकर किसी और को लाया जाएगा या उनकी स्थिति को छिपाकर सत्ता चलाई जाएगी। कोम इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र बन गया है, जहां इलाज के साथ-साथ अहम फैसले भी लिए जा रहे हैं। सीमित आधिकारिक जानकारी और AI वीडियो जैसे कदमों ने पारदर्शिता पर और सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि ईरान इस सस्पेंस को कैसे खत्म करता है।









