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वैश्विक तनाव के बीच भारत की LPG सप्लाई पर दबाव, आयात में तेज गिरावट

भारत की ऊर्जा जरूरतों पर एक नया दबाव उभरता दिखाई दे रहा है, क्योंकि मार्च 2026 में देश के एलपीजी (LPG) आयात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध शिपिंग आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीनों की तुलना में आयात में भारी कमी आई है, जिसने सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च के दौरान कुल एलपीजी आयात घटकर करीब 1.22 मिलियन टन रह गया। यह जनवरी के स्तर से लगभग आधा और फरवरी की तुलना में भी काफी कम है, जबकि फरवरी में दिनों की संख्या पहले से ही कम थी। इस गिरावट का सीधा असर घरेलू गैस उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।

इस बदलाव के पीछे प्रमुख कारण वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां मानी जा रही हैं। खासतौर पर मध्य-पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा ने सप्लाई को प्रभावित किया है। महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स पर अनिश्चितता बढ़ने से कई देशों से आने वाली खेपों में देरी या कमी देखी गई।

दिलचस्प रूप से, इस दौरान आपूर्ति के स्रोतों में भी बदलाव देखने को मिला। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर बनकर उभरा। वहीं, लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद ईरान ने भी सीमित स्तर पर आपूर्ति फिर शुरू की, जो इस स्थिति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत शामिल रहे, हालांकि इनसे आने वाली मात्रा भी सामान्य स्तर से कम रही।

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर यह अस्थिरता जारी रहती है, तो भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक भंडारण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।