भारत अब अपने स्वदेशी नेक्स्ट-जनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) को मित्र देशों को एक्सपोर्ट करने की योजना बना रहा है। यह कदम न केवल भारतीय रक्षा निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि हिंद महासागर और उससे आगे के क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत को भी मजबूत करेगा। खासकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा की बढ़ती जरूरतों के बीच यह कदम रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। NGMV युद्धपोत लगभग 1,450 टन वजनी हैं और इसमें 8 BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लगी हैं, जो दुश्मन के जहाजों और जमीन पर मौजूद ठिकानों पर लंबी दूरी से सटीक हमला कर सकती हैं।
इसके अलावा, एयर डिफेंस के लिए 24 VL-SRSAM मिसाइल, 76mm गन, AK-630M CIWS और VSHORADS जैसे सुरक्षा सिस्टम लगाए गए हैं। कम लागत में अधिक मारक क्षमता इसे छोटे देशों के लिए आदर्श बनाती है। इन युद्धपोतों की स्टेल्थ डिजाइन उन्हें रडार और इंफ्रारेड से छुपाती है, जिससे वे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी में ऑपरेशन के लिए बेहद प्रभावी बनते हैं। NGMV की अधिकतम स्पीड 35 नॉट्स और रेंज 2,800 नॉटिकल माइल है, जो लंबी दूरी के मिशनों के लिए पर्याप्त है।
Cochin Shipyard Limited इस प्रोजेक्ट के तहत ₹9,804 करोड़ की लागत से लगभग 6 जहाज बना रही है, जिनकी डिलीवरी 2027 से शुरू होगी। हर जहाज में करीब 80-90 क्रू मेंबर तैनात होंगे। ये युद्धपोत दुश्मन के जहाजों को रोकने, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऑफशोर आर्थिक संसाधनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत की यह पहल मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को रणनीतिक अवसर में बदलती है और देश को भरोसेमंद डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। छोटे, तेज और घातक प्लेटफॉर्म की मांग के बीच, NGMV अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के दबदबे को और मजबूत करेगा।









