Uttar Pradesh

Family Law पर इलाहाबाद उच्च न्यायालयका फैसला: बहू पर सास-ससुर को गुजारा भत्ता देने का कानूनी दबाव नहीं

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि बहू अपने सास-ससुर को गुजारा भत्ता देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 144 में सास-ससुर को गुजारा भत्ते के अधिकार वाले व्यक्तियों में शामिल नहीं किया गया है। अदालत ने कहा कि यह केवल एक नैतिक दायित्व हो सकता है, लेकिन इसे कानूनी अनिवार्यता के रूप में लागू नहीं किया जा सकता।

यह निर्णय चार फरवरी, 2026 को बुजुर्ग दंपत्ति राकेश कुमार और उनकी पत्नी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने के बाद आया। बुजुर्ग दंपत्ति ने दलील दी थी कि वे वृद्ध, अनपढ़ और दरिद्र हैं और अपने मृतक बेटे पर पूरी तरह निर्भर थे। जबकि उनकी बहू उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर है और पर्याप्त आय अर्जित करती है। अदालत ने कहा कि बहू का नौकरी में होना अनुकंपा पर आधारित नहीं है और इस आधार पर गुजारा भत्ता देना कानूनी दायित्व नहीं बनता।