मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्षों के बीच भारत सरकार ने एक विशेष अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस समूह के अध्यक्ष होंगे। इसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट संकट के संभावित प्रभावों पर नजर रखना और आवश्यक नीतिगत कदम उठाना है।
समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित अन्य संबंधित केंद्रीय मंत्री सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह समूह विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा, तेल और गैस आपूर्ति, तथा आर्थिक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगा।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा—करीब 88% कच्चा तेल और आधी प्राकृतिक गैस—हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात होता है। हाल के हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और अधिक गंभीर हो गया है। इस स्थिति में घरेलू ईंधन कीमतों में उछाल या आपूर्ति में बाधा को रोकने के लिए यह समूह सक्रिय रूप से काम करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का समन्वित अंतर-मंत्रालयी प्रयास न केवल संकट के समय त्वरित निर्णय लेने में मदद करेगा, बल्कि भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा। केंद्र सरकार का यह कदम यह दर्शाता है कि वैश्विक संकटों के प्रभावों से निपटने के लिए भारत ने पूर्व तैयारी और निगरानी को प्राथमिकता दी है।









