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नौसेना की ताकत में बढ़ोतरी, 2026 में मिल सकते हैं राफेल मरीन ट्रेनर जेट्स

भारतीय नौसेना को राफेल मरीन ट्रेनर जेट्स तय समय 2028 से पहले, 2026 तक मिलने की संभावना है। पहली खेप में आने वाले ये दो-सीट वाले ट्रेनर जेट्स जमीन से ऑपरेट होंगे और मुख्य रूप से पायलटों और तकनीकी स्टाफ को एडवांस एवियोनिक्स और आधुनिक युद्ध तकनीकों की ट्रेनिंग देने के काम आएंगे। भारत और फ्रांस के बीच 28 अप्रैल 2025 को हुए 63,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत कुल 26 राफेल मरीन जेट खरीदे जा रहे हैं। इसमें 22 सिंगल-सीट फाइटर जेट्स एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने में सक्षम होंगे, जबकि 4 ट्विन-सीट ट्रेनर जेट्स केवल जमीन से ऑपरेट होंगे। ट्रेनर जेट्स की जल्दी डिलीवरी का बड़ा फायदा यह होगा कि 2028 में आने वाले फुल कॉम्बैट राफेल जेट्स को तुरंत ऑपरेशन में लगाया जा सकेगा।

इन जेट्स से भारतीय नौसेना के INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर तैनात पायलट और ग्राउंड स्टाफ पहले से ही तैयार हो जाएंगे। राफेल मरीन जेट्स में लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल Meteor और एंटी-शिप मिसाइल Exocet जैसे अत्याधुनिक हथियार होंगे, जो समुद्री युद्धक क्षमता को काफी मजबूत बनाएंगे। ये जेट्स धीरे-धीरे पुराने रूसी मिग-29K जेट्स की जगह लेंगे। इसके अलावा, इन नए जेट्स के करीब 80% पार्ट्स पहले से नौसेना के राफेल विमानों से मिलते-जुलते हैं, जिससे रखरखाव और लॉजिस्टिक्स आसान होंगे। भारत और फ्रांस का लक्ष्य 2030 तक सभी 26 जेट्स की डिलीवरी पूरी करना है। ट्रेनर जेट्स की समय से पहले डिलीवरी भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।