1 अप्रैल 2026 से देश में आयकर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने की संभावना है, जो खास तौर पर नौकरीपेशा वर्ग को प्रभावित करेंगे। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, स्पष्ट और पारदर्शी बनाना है ताकि आम व्यक्ति आसानी से नियमों को समझ सके और अनुपालन कर सके।
नए ढांचे में नियमों की संख्या को काफी कम किया गया है, जिससे जटिलता घटेगी। अब कई कर योग्य सुविधाओं के लिए तय फॉर्मूला अपनाया जाएगा, जिससे टैक्स कैलकुलेशन में भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी। कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले लाभ जैसे आवास, वाहन, भोजन, उपहार और शिक्षा भत्ते को अब निश्चित मानकों के आधार पर टैक्स में शामिल किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से समझ आएगा कि किन सुविधाओं पर कितना कर लगेगा।
कंपनी द्वारा दिए गए घर पर टैक्स अब शहर की जनसंख्या के आधार पर तय होगा। बड़े शहरों में यह सैलरी का 10%, मध्यम शहरों में 7.5% और छोटे शहरों में 5% रहेगा, जो पहले की तुलना में कम है।वाहन और ड्राइवर सुविधा के लिए भी तय मासिक टैक्स निर्धारित किया गया है। इसी तरह ऑफिस में मिलने वाले भोजन पर छूट बढ़ाकर प्रति मील 200 रुपये कर दी गई है और उपहारों पर छूट सीमा भी बढ़ाई गई है।
परिवार वाले कर्मचारियों को राहत देते हुए बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च पर टैक्स-फ्री सीमा बढ़ाई गई है। इसके अलावा सीमित राशि तक ब्याज-मुक्त लोन को भी टैक्स से बाहर रखा गया है।कुल मिलाकर, यह बदलाव टैक्स सिस्टम को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के लिए योजना बनाना और बचत करना आसान हो सकेगा।









