भारत में 2027 की जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण, हाउस लिस्टिंग, 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें मकानों और उनकी सुविधाओं का विवरण दर्ज किया जाएगा। दूसरा चरण, जिसमें लोगों की गणना होगी, अगले साल 9 फरवरी से फरवरी की अंतिम तारीख तक चलेगा। विशेष मामलों में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह काम इस साल अक्टूबर में पूरा किया जाएगा। इस बार जातियों की गणना भी शामिल होगी, जिससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या सामने आएगी।
जनगणना के आंकड़े महिला आरक्षण लागू करने में मदद करेंगे। सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं में 33% महिलाओं को आरक्षण मिलेगा, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। दक्षिण भारत के राज्यों को चिंता है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन के बाद उनके प्रतिनिधित्व में कमी हो सकती है। इसी वजह से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक 1971 की जनगणना को आधार बनाने की मांग कर रहे हैं।
जातिगत आंकड़े आने से ओबीसी वर्ग आरक्षण बढ़ाने की मांग कर सकता है, जबकि SC-ST के लिए आरक्षण पहले से सुनिश्चित है। शहरों और गांवों में पलायन की वजह से आधारभूत संरचनाओं पर दबाव बढ़ा है। हाउस लिस्टिंग के आंकड़े इन बदलावों का सही चित्र देंगे और कल्याण और विकास योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इस तरह, 2027 की जनगणना न केवल आबादी, बल्कि राजनीति और सामाजिक नीतियों पर भी गहरा असर डालेगी।









